Saturday, 26 November 2011

भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का कार्यालय स्‍थापना एवं कार्य

भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक का कार्यालय , जो आम तौर पर आर.एन.आई. के नाम से जाना जाता है , पहली जुलाई 1956 को अस्‍ति‍त्‍व में आया । इसकी स्‍थापना प्रथम प्रेस आयोग 1953 की सि‍फारि‍श पर प्रेस एवं पुस्‍तक पंजीयन अधि‍नि‍यम 1867 में संशोधन करके की गई थी । प्रेस एवं पुस्‍तक पंजीयन अधि‍नि‍यम में भारतीय समाचारपत्रों के पंजीयक के कर्तव्‍यों और कार्यों को दि‍या गया है । पि‍छले कुछ वर्षों के दौरान भारत के समाचारपत्रों के पंजीयक को सौंपे गए कुछ और दायि‍त्‍वों के कारण यह कार्यालय कुछ वि‍धि‍ वि‍हि‍त और कुछ सामान्‍य दोनों तरह के कार्य कर रहा है ।

वि‍धि‍ वि‍हि‍त कार्यों के अन्‍तर्गत नि‍म्‍नलि‍खि‍त आते है:‑

(1) देश भर में प्रकाशि‍त समाचारपत्रों का एक रजि‍स्‍टर तैयार करना , उसका रख रखाव करना और उसमें समाचारपत्रों का वि‍वरण संकलि‍त करना

(2) वैध घोषणा के अन्‍तर्गत प्रकाशि‍त समाचारपत्रों को पंजीकरण प्रमाणपत्र जारी करना ,

(3) समाचारपत्रों के प्रकाशकों द्वारा प्रेस एवं पुस्‍तक पंजीयन अधि‍नि‍यम की धारा 19‑डी के अन्‍तर्गत प्रसारण स्‍वामि‍त्‍व , आदि‍ सूचना के साथ प्रति‍ वर्ष भेजे गए वार्षिक वि‍वरण की जांच और वि‍श्‍लेषण करना

(4) इच्‍छुक प्रकाशकों को घोषणा दायर करने के लि‍ए जि‍ला मजि‍स्‍ट्रेटों को उपलब्‍ध नामों की सूचना देना ,

(5) यह सुनि‍श्‍चि‍त करना कि‍ समाचारपत्र प्रेस और पुस्‍तक पंजीयन अधि‍नि‍यम के प्रावधानों के अन्‍तर्गत प्रकाशि‍त कि‍ए जाते हैं ,

(6) प्रेस और पुस्‍तक पंजीयन अधि‍नि‍यम की धारा 19‑एफ के अन्‍तर्गत प्रकाशकों द्वारा अपने वार्षिक वि‍वरणों में दि‍ए गए प्रसार दावों की जांच करना ,और

(7) भारत में प्रेस के बारे में उपलब्‍ध समस्‍त सूचना तथा आंकड़ों और वि‍शेष रूप से प्रसार तथा समान स्‍वामि‍त्‍व वाली इकाइयों के क्षेत्र में उभरती प्रवृत्‍ति‍यों के उल्‍लेख के साथ एक रि‍पोर्ट तैयार करना और उसे प्रति‍ वर्ष 31 दि‍सम्‍बर को या उससे पहले सरकार को प्रस्‍तुत करना ।

सामान्‍य कार्यों के अन्‍तर्गत नि‍म्‍नलि‍खि‍त कार्य आते हैं;‑

(1) अखबारी कागज आबंटन नीति‍ और दि‍शा‑ नि‍र्देशों का क्रि‍यान्‍वयन और समाचारपत्रों का पात्रता प्रमाणपत्र जारी करना ताकि‍ वे अखबारी कागज का आयात कर सकें और हकदारी प्रमाणपत्र जारी करना ताकि‍ वे देशी अखबारी कागज प्राप्‍त कर सकें ।

(2) समाचारपत्र प्रति‍ष्‍ठानों की मुद्रण और कम्‍पोजिंग मशीनें और अन्‍य संबंधि‍त सामग्री आयात करने की आवश्‍यक जरूरतों को मूल्‍यांकि‍त और प्रमाणि‍त करना ।

Sunday, 13 November 2011

पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम आजाद का अपमान

अमरीका ने एक बार फिर तलाशी के नाम पर भारत के पूर्व राष्ट्रपति डॉ.अब्दुल कलाम आजाद का अपमान किया है। कलाम की यहां न्यूयॉर्क एयरपोर्ट पर 2 बार तलाशी लेने के बाद विमान के अन्दर तलाशी के दौरान सुरक्षाकर्मी उनके जूते और जैकेट भी साथ ले गए।
पूर्व राष्ट्रपति एपीजे अब्दुल कलाम के साथ अमरीका का यह अपमानजनक व्यवहार पहली बार नहीं हुआ है, इससे पहले भारतीय भूमि पर भी अमरीका सुरक्षा एजेंसियां उनकी जांच की अप्रिय कार्रवाई कर चुकी हैं। अमरीका के लिए भले यह सुरक्षा जांच भर होए लेकिन किसी राजनयिक के साथ इस तरह की कार्रवाई उसके देश का अपमान है

Monday, 10 October 2011

Monday, 1 August 2011

पाकिस्तान की नयी विदेश मंत्री अलगाव वादी नेताओं से मुलाकात की

पाकिस्तान की नयी विदेश मंत्री ने दिल्ली की सरजमीं पर कदम रख कर अमन और चैन का संदेश देने की बात कही है लेकिन वही हिना रब्बानी ने भारत सरकार खफा-खफा नजर आ रही है, जिसके पीछे वजह बताई जा रही है कि हिना ने आते ही भारत के अलगाव वादी नेताओं से मुलाकात की है.
हिना ने जम्मू एवं कश्मीर के अलगाववादी संगठन, हुर्रियत कांफ्रेंस के प्रमुख मीरवाइज उमर फारुख और सैयद अली गिलानी से मंगलवार देर रात मुलाकात की है. मीटिंग में क्या हुआ इस बारे में अभी तक कुछ भी पता नहीं हैं लेकिन मीटिंग के बाद मीरवाइज उमर फारुख के चेहरे पर काफी इत्मीनान नजर आया.

Sunday, 24 July 2011

यह किस तरह का कानून है ?

एक पाकिस्तानी भारतीय हो सकता है ? जब वह जम्मू और कश्मीर के किसी एक लडकी से शादी कर ले, लेकिन इसके विपरीत जब वही लड़की भारत के किसी भी हिस्से के एक हिंदू से शादी करे तो वह जम्मू और कश्मीर की नागरिक नहीं हो सकते है, जम्मू और कश्मीर कि नागरिकाता खो देती है ? यह किस तरह का कानून है ?

Tuesday, 19 July 2011



मुंबई में बुधवार शाम भीड़भाड़ वाले इलाकों में 10 मिनट के अंतर पर सिलसिलेवार तीन विस्फोटों में कम से कम 21 लोगों की मौत हो गयी और करीब 141 लोग घायल हो गये. इस घटना ने 2008 के 26/11 आतंकी हमले की याद ताजा कर दी है.

Sunday, 3 July 2011

टीम इंडिया को कुछ कठोर फ़ैसले लेना ज़रूरी है.



वेस्टइंडीज़ मैच तक टीम पीक करेगी. यानी सर्वश्रेष्ठ आना अभी बाकी है, पर इसके लिए कुछ कठोर फ़ैसले लेना ज़रूरी है.
यूसुफ़ धमाकेदार हैं, पर विश्वकप में रुतबे के मुताबिक नहीं खेल रहे हैं. उन्होंने 5 मैचों में 63 रन बनाए हैं. तो क्या विश्वविजय के सपने को ताक पर रखकर उन्हें एक और मौका दें? या आर. अश्विन को आज़माएं. माना कि अश्विन एक सरप्राइज पैकेज हैं, लेकिन कहीं ऐसा न हो कि सरप्राइज डिब्बे में बंद ही रह जाए.